June 13, 2024
Pediatric Cancer

Pediatric Cancer

कैंसर (Pediatric Cancer) एक ऐसी गंभीर बीमारी है, जो किसी भी आयु और लिंग के व्यक्ति को अपना शिकार बना सकता है, यानी यह बीमारी बच्चों को भी अपनी चपेट में ले सकती है। WHO के डाटा के मुताबिक, हर साल लगभग 4 लाख बच्चों और टीनेजर्स में कैंसर विकसित होता है। बच्चों में कैंसर की वजह से उनका और उनके पूरे परिवार का जीवन प्रभावित होता है, इसलिए इस बीमारी के बारे में जानकार बनना और सतर्क रहना बेहद महत्वपूर्ण है। आइए जानते हैं, इस बारे में।

Pediatric Cancer

क्या है Pediatric Cancer?

बच्चों में 14 साल तक की उम्र और टीनेजर्स में 15 से 19 साल तक में होने वाले कैंसर को Pediatric cancer या Childhood Cancer कहा जाता है। यह वयस्कों में होने वाले कैंसर से काफी अलग होता है। बच्चों में कैंसर का इलाज बड़ो की तुलना में ज्यादा प्रभावी होता है, लेकिन आगे चलकर फिर से कैंसर होने का या अन्य किसी मेडिकल कंडिशन का खतरा काफी बढ़ जाता है।

हर साल भारत में Pediatric Cancer के लगभग 50 हजार नए मामले देखने को मिलते हैं, जो इस गंभीर बीमारी के बोझ को बढ़ाते जाते हैं। बच्चों में होने वाले कैंसर में सबसे आम कैंसर हैं- ब्लड कैंसर (Leukaemia), ब्रेन कैंसर, सॉलिड ट्यूमर, जैसे- न्यूरोब्लास्टोमा और विल्मस ट्यूमर और लिम्फोमा।

क्या हैं Pediatric Cancer के लक्षण?

बच्चों में होने वाले कैंसर में आमतौर पर थकान, बुखार, सिरदर्द, अकारण वजन कम होना, ब्लीडिंग होना या ब्रूजिंग, त्वचा पर रैश, जोड़ो में सूजन या दर्द होना, शरीर के किसी भाग में लंप दिखना, बार-बार इन्फेक्शन होना, त्वचा की रंगत फीकी हो जाना, आंखों की पुतलियों के पीछे सफेद रंग नजर आना, देखने में तकलीफ होना आदि शामिल हैं।

क्या है इसका इलाज?

Pediatric Cancer का जल्दी से जल्दी पता लगाकर इलाज करवाया जाए, तो इसका सफल इलाज होने की संभावना बढ़ जाती है और बच्चा सामान्य जीवन जी सकता है। भारत में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसका पता काफी देर चल पाता है। कई पेरेंट्स को चाइल्डहुड कैंसर के बारे में पता ही नहीं होता है या इसके सफल इलाज की दर के बारे में जानकारी नहीं होती है। इसलिए वे बच्चों को इलाज के लिए लाने में काफी देर कर देते हैं।

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